अलविदा जुमे पर कोरोना की वबा से निजात कि दुआएं

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अलविदा जुमे पर कोरोना की वबा से निजात कि दुआएं

हुआ जाता है रुख़्सत माहे रमज़ां या रसूलल्लाह…

Varanasi/Dil India LiVe (Mohd Rizwan/Dr shah meraj)

हुआ जाता है रुख़्सत माहे रमज़ां या रसूलल्लाह,

रहा अब चन्द घड़ियों का ये मेहमां या रसूलअल्लाह,

खुशी की लहर दौड़ी हर तरफ़ रमज़ां की आमद पर

मगर रंजीदह है अब हर मुसलमां या रसूलअल्लाह,

मुसर्रत ही मुर्सरत और खुशी ही थी खुशी जिस दम

नज़र आया हिलाले माहे रमज़ां या रसूलअल्लाह,

मगर अब गम के मारे खून के आंसु बहाते हैं,

चला तड़पा के हाथ माहे रमज़ां या रसूलअल्लाह..।

अलविदा जुमे को मस्जिदों में इमाम साहेबान ने खुतबे के दौरान जब ये चन्द लाईने तरन्नुम में पेश कि तो इसे सुनकर सभी अपनी आंखे नम करते दिखाई दिये। हर तरफ रमज़ान की रुख़्सती और नेकी का महीना जाने का दर्द आंखों से छलक पड़ा। इस दौरान इमाम साहेबान ने रमज़ान की फज़िलते बयां की और कहा कि रमज़ान मोहब्बत और बेशुमार नेमतो, बरकतों का महीना था जिसने इबादत की उसने अपने रब को राज़ी कर लिया मगर जिसने नहीं की वो बदनसीब था जो इस पाक महीने की फज़ीलत नहीं समझ सका। अल्लाह उसे माफ करे, आइंदा जिन्दगी रहे तो उसे रमज़ान के रोज़े रखने की हिदायत दे। इस दौरान हर बार कि तरह न तो मस्जिदो में जनसैलाब दिखा और न ही सड़क तक नमाज़े हुई बल्कि लाक डाउन के चलते हर मस्जिदो में केवल गिनती के ही लोग प्रशासन कि अनुमति से नमाज़ अदा करने पहुंचे थे। इसके अलावा तमाम लोगो ने घरो में ही नमाज़े अदा कि मगर रमज़ान के अलविदा का गम उनके चेहरे पर साफ दिख रहा था

ऐ अल्लाह तू हमारे मुल्क की हिफाज़त कर

इस दौरान कोरोना की वबा से निजात कि मस्जिदों में जहाँ दुआएं हुई वहीं देश, कारोबार पर भी लोगो ने दुआ में हाथ उठाया। इमाम साहेबान ने कहा कि, या अल्लाह तू रहीम है तू करीम है, बिना तेरी मर्जी के कुछ भी नहीं हो सकता। ऐ अल्लाह तू हमारे मुल्क की हिफाज़त कर। हमारे मुल्क की सरहदों को दुश्मनों से बचा मौला। तू हम सब पर रहम कर, करम कर, हम सबको नेक राह दिखा, ऐ पाक परवरदिगार तू अपने हबीब के सदके में दुनिया के तमाम मुसलमानों की हिफाजत कर खास कर जहां मुसलमानों पर जुल्म हो रहा है उस जुल्म को रोक दे, या रब कत्ले आम रोक दे, मुसलमानों के हालात ठीक कर दे, जो लोग रोज़ा हैं उन्हें ईद की खुशियां दे, जो रोज़ा नहीं रख सकें आइंदा साल उन्हें रोज़ा रखने की तौफीक अता फरमा, ऐ अल्लाह हम सब जैसे भी हैं, हैं तो तेरे बंदे ही, नबी-ए-करीम के सदके में हम सबको कोरोना वायरस से निजात दे..।

अलविदा जुमे को देश भर कि मस्जिदों में ऐसी ही दुआएं सुनाई दी, इस पर तमाम लोगों के लबों से एक साथ निकल पड़ा, आमीन..सुम्मा आमीन..। इस दौरान मस्जिदों के आसपास कड़ी सुरक्षा व्यवस्था थी। इससे पहले मुकद्दस रमज़ान का आखिरी जुमा यानी अलविदा पर शहर की तमाम मस्जिदों में रोज़ेदारों का जन सैलाब उमड़ता था मगर इस बार लाक डाउन होने से घरो पर ज़्यादतर लोगों ने नमाज़ अदा की। 

गरीबो का रखे ख्याल

ईद आने वाली है। ऐसे में हर मुसलमान ईद की खुशी मना लें इसके लिए आप ज्यादा से ज्यादा गरीबो और मिस्कीनों का ख्याल रखें। शहर काज़ी मौलाना गुलाम यासीन साहब ने कहा कि गरीबो को ज्यादा से ज्यादा ज़कात, खैरात, सदका और फितरा अदा करें। ज्यादा से ज्यादा गरीबो की मदद करें, ताकि उनकी ईद हो जाये। मस्जिद ढ़ाई कंगूरा के इमाम हाफिज़ नसीम अहमद बशीरी ने कहा कि हर अमीर की जिम्मेदारी है कि वो गरीबो का ख्याल रखे, इसलिए ही इस्लाम में ज़कात, सदका-ए-फित्र का सिस्टम बना है। अगर यह सिस्टम न होता तो संभव है कि देश में करोड़ों लोग ईद कि खुशियो से दूर हो जाते मगर इस सिस्टम के चलते ही अमीर गरीबो की मदद करता है और हर मुसलमान की ईद हो जाती है। ईद कि नमाज़ के पहले हर मुसलमान जो साहिबे नेसाब है वो जकात और फितरा अदा कर दे

By |2020-05-22T12:32:32+00:00May 22nd, 2020|आस्था\पर्व|Comments Off on अलविदा जुमे पर कोरोना की वबा से निजात कि दुआएं

About the Author:

I started my career as a journalist in August 1999 with the Hindi daily Sanmarg. This letter of Dharmasangha gave me a strong identity. From October 2007 to 2010, I worked in Amar Ujala and Compact and spread across the country. When the Rashtriya Sahara Varanasi unit was launched, I was called there and from October 2010 to March 2019 I was part of this unit. Today when the world started changing, things started going digital, so I started my career as an editor in digital media with Dil India Live. This platform of mine does not work nor receive financial help from any political party, spokesperson of any social or religious organization. मैंने बतौर पत्रकार कैरियर कि शुरुआत अगस्त 1999 में हिन्दी दैनिक सन्मार्ग से किया था। धर्मसंघ के इस पत्र से मुझे मज़बूत पहचान मिली। अक्टूबर 2007 से 2010 तक मैंने अमर उजाला और काम्पैक्ट में काम किया और देश भर में छा गया। राष्ट्रीय सहारा वाराणसी यूनिट लांच हुई तो मुझे बुलाया गया वहा अक्टूबर 2010 से मार्च 2019 तक मैं इस यूनिट का हिस्सा था। आज जब दुनिया में बद्लाव शुरू हुआ, चीज़े डिज़िटल होने लगी तो मैं भी डिज़िटल मीडिया में बतौर सम्पादक अपने कैरियर कि नई शुरूआत दिल इंडिया लाइव के साथ की। मेरा यह प्लेट्फार्म किसी सियासी दल, किसी सामजिक या धार्मिक संगठन का प्रवक्ता बन कर न तो काम करता है और न ही किसी से आर्थिक मदद प्राप्त करता है।