नींद में मुंह से आती है लार तो सावधान

//नींद में मुंह से आती है लार तो सावधान

नींद में मुंह से आती है लार तो सावधान

कही आप गंभीर बीमारी कि चपेट में तो नही हैं !

अमन/डा. शाह मेराज

वाराणसी/दिल इंडिया लाइव

हमारे जिस्म में अन्‍य ग्रंथियों जैसी लार ग्रंथि भी होती है जो शरीर में लार का निर्माण करती रहती है। ये लार हमारे भोजन को पचाने में काफी हद तक मदद करते है। लार ग्रंथि को वैज्ञानिक भाषा में एक्‍सोक्राइन ग्र‍ंथि भी कहते हैं। यह शरीर के बाहर या अंदर पदार्थों का आदान प्रदान करती है। लार में बलगम, लवण, जीवाणुरोधी यौगिक, एंजाइम और पानी जैसे कई तत्व होते हैं। हमारे जिस्म में लार ग्रंथि का होना बहुत जरूरी होता है, इसका संबंध पूरे जिस्म से है। जब हम आप गहरी नींद से सोकर जागते हैं तो अक्सर देखा जाता है कि होठो के किनारे से लार की धार बह रही है। चिकित्सको की माने तो सोते हुए इंसान के होठो के किनारे से लार आना बहुत आम है लेकिन कई बार ये किसी गंभीर बीमारी का संकेत भी होता है, एक  रिपोर्ट…

आइये पहले जानते हैं कि हमारी नींद और होठो के किनारे से लार आने के बीच संबंध क्या है। आप और हम जब नींद में होते हैं तो हमारे चेहरे की नसें आराम कि मुद्रा में होती है। इसलिए जब हमारे लार के ग्लैंड्स लार तैयार करते हैं तो अमूमन वो बहने लगती है, दरअसल उस वक्त इंसान उसे निगल नहीं सकता हैं। अगर सोते हुए लार बहती है तो आपने देखा होगा कि अमूमन लार तभी होठो के किनारे से बहती है जब हम और आप सोते समय करवट ले रहे होते है।

खाने-पीने से एलर्जी     

नाक से संबंधित एलर्जी और खाने पीने की वस्तुओ से होने वाली एलर्जी की वजह से लार का अधिक निर्माण हो जाता है और वो बहने लग जाती है। शरीर में लार बनाने वाले अलग से ग्लैंड्स होते हैं। यही वजह है की सोते समय जागते समय की अपेक्षा ज़्यादा लार बनती है। हमे यह भी जानना ज़रुरी है की सोते समय लार बहने के कारण क्या है, डा. धर्मेंद्र यादव कि माने तो सांस नलिका के संक्रमण आमतौर पर सांस लेने और निगलने की समस्याओं से जुड़ जाते हैं। इन समस्याओं में लार जमा हो जाने से मुंह से वो बहने लग जाती है, साथ ही, जब बुखार या ज़ुकाम के कारण नाक बंद होती है तो हम सब अपने मुंह से सांस लेते हैं और ऐसे में हमारे होठो के किनारे से लार बहने लगती है। 

दवाईओ के सेवन से भी बहती है लार

अगर आप कोई दवाई या ड्रग्स ले रहे हैं तो सोते हुए लार बहना आपके लिए बहुत आम बात हो सकती है। कुछ एंटीडिप्रेसेंट और दवाएं जैसे कि मॉर्फिन, पिलोकार्पिन आदि लार का निर्माण बढ़ा देती हैं। चिकित्सको का मानना है कि एसिड रिफ्लक्स एपीसोड्स कि वजह से गेस्ट्रिक एसिड बनता है। इससे एसोफागोसलाइवरी उत्तेजित होकर बहुत अधिक लार बनने लगती है।

सोते हुए डर लगने की समस्या

गले के पीछे मौजूद टोंसिल्स ग्लैंड्स होते हैं, जिनमें सूजन आ जाने से टोंसिलाइटिस हो सकता है। सूजन की वजह से गले का रास्ता छोटा हो जाता है जिससे लार गले से उतर नहीं पाती और मुंह से बहने लग जाती है।  वही कुछ लोगों को सोते हुए डर लगने की समस्या होती है। इस समस्या का एक लक्षण लार बहना भी है। युवाओं में साइकोपैथोलॉजिकल कारण से ये समस्या होती हैं। ऐसा उनके भावनात्मक तनाव में होने के कारण या शराब लेने के कारण और नींद की कमी के कारण भी हो सका है। कई बार नींद से जुड़ी अन्य समस्याओं जैसे नींद में चलना, नींद में बात करना आदि में भी लार बहती है। इसलिए अगर आपको या घर में किसी भी शक्स के मुह से ज़्यादा लार आती है तो चिकित्सको से सम्पर्क करे और अपनी मेडिकल हिस्ट्री से उन्हे अवगत कराये।

By |2020-01-22T07:48:03+00:00January 22nd, 2020|क्लिनिक|Comments Off on नींद में मुंह से आती है लार तो सावधान

About the Author:

I started my career as a journalist in August 1999 with the Hindi daily Sanmarg. This letter of Dharmasangha gave me a strong identity. From October 2007 to 2010, I worked in Amar Ujala and Compact and spread across the country. When the Rashtriya Sahara Varanasi unit was launched, I was called there and from October 2010 to March 2019 I was part of this unit. Today when the world started changing, things started going digital, so I started my career as an editor in digital media with Dil India Live. This platform of mine does not work nor receive financial help from any political party, spokesperson of any social or religious organization. मैंने बतौर पत्रकार कैरियर कि शुरुआत अगस्त 1999 में हिन्दी दैनिक सन्मार्ग से किया था। धर्मसंघ के इस पत्र से मुझे मज़बूत पहचान मिली। अक्टूबर 2007 से 2010 तक मैंने अमर उजाला और काम्पैक्ट में काम किया और देश भर में छा गया। राष्ट्रीय सहारा वाराणसी यूनिट लांच हुई तो मुझे बुलाया गया वहा अक्टूबर 2010 से मार्च 2019 तक मैं इस यूनिट का हिस्सा था। आज जब दुनिया में बद्लाव शुरू हुआ, चीज़े डिज़िटल होने लगी तो मैं भी डिज़िटल मीडिया में बतौर सम्पादक अपने कैरियर कि नई शुरूआत दिल इंडिया लाइव के साथ की। मेरा यह प्लेट्फार्म किसी सियासी दल, किसी सामजिक या धार्मिक संगठन का प्रवक्ता बन कर न तो काम करता है और न ही किसी से आर्थिक मदद प्राप्त करता है।