लोकतांत्रिक संस्थाओं का अस्तित्व खतरे में

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लोकतांत्रिक संस्थाओं का अस्तित्व खतरे में

भारत सदैव साझी विरासत और साझी संस्कृति का रहा देश

लोकतांत्रिक संस्थाओं का अस्तित्व खतरे में है और मौजूदा भाजपा सरकार धर्मनिरपेक्षता, संवैधानिक मूल्य और लोकतंत्र के लिए खतरा बन गई है। ऐसे में आमजन को इन संस्थाओं को बचाने के लिए आगे आना होगा। कचहरी स्थित अंबेडकर पार्क में आयोजित कांग्रेस संवाद को संबोधित करते हुए युवा कांग्रेस नेता सरिता पटेल ने यह बात कही। उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस हमेशा कमजोर वर्गों की हिमायती रही है और जब से कांग्रेस सत्ता से बाहर हुई है देश में पूँजीवादी ताकतों का वर्चस्व स्थापित हुआ है जो देश और निर्बल वर्गों के हित में नहीं है। हमें इन ताकतों को उखाड़ फेंकना है और आमजन की हिमायती कांग्रेस को एक बार फिर से देश की बागडोर सौंपनी होगी।लखनऊ से आए कांग्रेस कार्यकर्ता शाहनवाज आलम ने कहा कि कांग्रेस मुसलमानों और वंचित समुदाय की हितैषी रही है, हमें कांग्रेस के नेतृत्व को अपनी मूलभूत आवश्यकताओं से अवगत कराना होगा, जिससे आने वाले चुनाव से पूर्व इसे पार्टी के घोषणापत्र में शामिल किया जा सके। इतिहास-मर्मज्ञ और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. मोहम्मद आरिफ ने कहा कि तमाम लोकतांत्रिक संस्थाएं कांग्रेस के शासनकाल में ही स्थापित हुई हैं, जो आज खतरे में हैं। भारत सदैव साझी विरासत और साझी संस्कृति का देश रहा है, इसे आज एकरंगा बनाने की कोशिश की जा रही है जो हमारी परंपरा और संविधान के खिलाफ है। हमें इसे बचाने के लिए संघर्ष करना होगा। कांग्रेस नेता डॉ. अनूप श्रमिक ने कहा कि भाजपा के शासनकाल में दलितों और आदिवासियों पर हमले बढ़ रहे हैं और उनकी सुनने वाला कोई नहीं है। सामाजिक कार्यकर्ता जागृति राही ने कहा कि हमें बूथ प्रबंधन से लेकर विचारधारा तक मजबूत करना होगा। इस कार्यक्रम में जगधारी बिंद, दयाशंकर पटेल, श्यामबहादुर राजभर, कामता प्रसाद, ओमप्रकाश अंबेडकर, सिराज अहमद, संजय, पार्वती, मालती, सुखवंती, धर्मवीर, राजू, मोहन, वसीम आदि उपस्थित थे।

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By |2019-07-23T11:58:37+00:00December 2nd, 2018|कार्यक्रम|Comments Off on लोकतांत्रिक संस्थाओं का अस्तित्व खतरे में

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