Ramadan ka paigham 2020

//Ramadan ka paigham 2020

Ramadan ka paigham 2020

अब रमज़ान चन्द दिन का मेहमान…

Varanasi/Dil India Live

रमज़ान के पाक महीने का आखिरी जुमा अलविदा जुमे के नाम से जाना जाता है। आखिरी जुमा आते ही अल्लाह के नेक बंदों की आंखे इस गम में जहां आंसू बहाती नज़र आती हैं कि अब रमज़ान चन्द दिन का मेहमान है, वहीं दूसरी ओर उसे इस बात की खुशी भी होती हैकि अब ईद आयेगी, यानि उसके एक महीने कामयाबी से रोज़ा रखने की खुशी का दिन ईद। जी हां अल्लाह रब्बुल इ•जत हमे रमज़ान के एवज़ में जो तोहफा देता है उसे दुनिया में ईद के नाम से ही जाना जाता है। यह एक ग्लोबल पर्वहै। ईद का यह भी एक पैगाम है कि ईद की नमाज़ से पहले सदका-ए-फित्र ग्रीबो, मिसकीनों को दे दिया जाये। फित्रा देने की वजह से इसे ईद-उल-फित्र भी कहते हैं। ईद की खुशियां चांद देखकर मनाई जाती है। जैसे ही चांद का दीदार होता है एतेकाफ पर बैठे लोग अपनी इबादत की कामयाबी पर खुशी-खुशी वापस अपने घरों को लौटते हैं। जहां घर और मुहल्ले के लोग एतेकाफ की कामयाबी से लौटने पर उनका खैरमखदम करते हैं। ईद के दिन सुबह जल्दी नहा धोकर नये-नये कपड़ों में तैयार होकर मोमिनीन ईदगाह जाते हैं। ईद की नमाज़ हर मुसलमान पर वाजिब होने की वजह से ही ईद के दिन हर मुसलमान नमाज़ अदा करता दिखाई देता है।

ईद की नमाज़ से पहले मोमिनीन को चाहिए कि वो गरीबो, मिसकीनों को जक़ात, फितरा व खैरात जरूर दे दें, ताकि ईद के दिन किसी के तन पर मैला कपड़ा नज़र न आये। कोई कहीं अपने आपको मायूस व बेचारा न समझे, क्यों कि ईद का मतलब ही खुशी होती है इसलिए जब हम खुशी मनाये तो हमारे इर्द-गिर्द, आसपास व पड़ोस में जो भी है वो सभी खुश हों, तभी सही मायने में हमारी खुशी या हमारी ईद होगी। अल्ल्लाह फरमाता है ईद तोहफा है रोज़ेदारों के लिए। अपनी कुल रखी जमा पूंजी का ढाई फीसद मुस्लिम इस महीने में ज़कात निकालते हैं, ज़कात गरीबो, मिसकीनों, बेवा, बेसहारा वगैरह को दिया जाता है, ताकि उनकी भी ईद हो जाये। नबी-ए-करीम (स.) ने फरमाया कि रब ने माहे रमज़ान का रोज़ा रखने वालों के लिए जिंदगी में ईद और आखिरत के बाद जन्नत का तोहफा मुकर्रर कर रखा है। यानि इस महीने में जो रोज़ा रखेगा, इबादत करेगा और नबी के बताये रास्ते पर चलेगा तो उसके लिए यह तोहफा है। या अल्लाह हम सबको रमज़ान के सदके में ईद की खुशी दे..आमीन।

                           नोमान हसन खां  

(निदेशक, मदर हलीमा सेंट्रल स्कूल, ज़ेरगूलर, वाराणसी)

By |2020-05-20T14:36:41+00:00May 20th, 2020|आस्था\पर्व|Comments Off on Ramadan ka paigham 2020

About the Author:

I started my career as a journalist in August 1999 with the Hindi daily Sanmarg. This letter of Dharmasangha gave me a strong identity. From October 2007 to 2010, I worked in Amar Ujala and Compact and spread across the country. When the Rashtriya Sahara Varanasi unit was launched, I was called there and from October 2010 to March 2019 I was part of this unit. Today when the world started changing, things started going digital, so I started my career as an editor in digital media with Dil India Live. This platform of mine does not work nor receive financial help from any political party, spokesperson of any social or religious organization. मैंने बतौर पत्रकार कैरियर कि शुरुआत अगस्त 1999 में हिन्दी दैनिक सन्मार्ग से किया था। धर्मसंघ के इस पत्र से मुझे मज़बूत पहचान मिली। अक्टूबर 2007 से 2010 तक मैंने अमर उजाला और काम्पैक्ट में काम किया और देश भर में छा गया। राष्ट्रीय सहारा वाराणसी यूनिट लांच हुई तो मुझे बुलाया गया वहा अक्टूबर 2010 से मार्च 2019 तक मैं इस यूनिट का हिस्सा था। आज जब दुनिया में बद्लाव शुरू हुआ, चीज़े डिज़िटल होने लगी तो मैं भी डिज़िटल मीडिया में बतौर सम्पादक अपने कैरियर कि नई शुरूआत दिल इंडिया लाइव के साथ की। मेरा यह प्लेट्फार्म किसी सियासी दल, किसी सामजिक या धार्मिक संगठन का प्रवक्ता बन कर न तो काम करता है और न ही किसी से आर्थिक मदद प्राप्त करता है।