नागरी लिपि पर चल रही दस दिवसीय कार्यशाला का समापन

//नागरी लिपि पर चल रही दस दिवसीय कार्यशाला का समापन

नागरी लिपि पर चल रही दस दिवसीय कार्यशाला का समापन

यशोवर्मन के अभिलेख में पहली बार नागरी लिपि का प्रयोग:प्रो. सुमन जैन

वाराणसी के डीएवी पीजी काॅलेज में प्राचीन भारतीय इतिहास संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के तत्वावधान में चल रहे 10 दिवसीय कार्यशाला ‘ब्राह्मी लिपि से नागरी लिपि तक का विकास‘ के अंतिम दिन मंगलवार को विद्वान वक्ता प्रो. सुमन जैन ने कहा कि किस तरह से हम ब्राह्मी लिपि से चलकर देव नागरी लिपि तक पहुंचे हैं, उन्होंने कहा कि देवनागरी लिपि के पहले प्रोटो नागरी फिर नागरी और अंत में देवनागरी लिपि अस्तित्व में आयी। नालन्दा से प्राप्त यशोवर्मन के अभिलेख में पहली बार नागरी लिपि का प्रयोग किया गया और किस तरह से उसमें अक्षर सीधे होने लगते हैं और मात्राएं बदलने लगती हैं। दक्षिण भारत में नागरी लिपि का प्रयोग राष्ट्रकूटों के अभिलेख में मिलता है। उन्होंने प्राक्मौर्यन ब्राह्मी लिपि से शुरू कर मौर्य ने ब्राह्मी, शुंग ब्राह्मी, सातवाहन ब्राह्मी, शक क्षत्रप कुषाण ब्राह्मी, वाकाटक ब्राह्मी, गुप्त ब्राह्मी, उत्तर गुप्त ब्राह्मी, कुटिल ब्राह्मी, और नागरी लिपि के विकास को क्रमशः बारीकी से बताकर सभी प्रतिभागियों का ज्ञानवर्धन किया। अतिथियों का स्वागत डाॅ. मधु सिसौदिया एवं डाॅ. मुकेश कुमार सिंह, संचालन डाॅ. प्रशांत कश्यप, अध्यक्षता डाॅ. सत्यदेव सिंह एवं धन्यवाद ज्ञापन डाॅ. ओम प्रकाश कुमार ने किया। इस अवसर पर वाराणसी के विभिन्न महाविद्यालयों से आये प्राध्यापक, शोध छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
By |2019-02-26T11:28:33+00:00February 26th, 2019|शिक्षा\परीक्षा|Comments Off on नागरी लिपि पर चल रही दस दिवसीय कार्यशाला का समापन

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