पीएम मोदी के गुजरात में एक ऐसा घर, जो बताता है संविधान  

///पीएम मोदी के गुजरात में एक ऐसा घर, जो बताता है संविधान  

पीएम मोदी के गुजरात में एक ऐसा घर, जो बताता है संविधान  

वाराणसी से गुजरात गये दल ने देखा और जाना संविधान घर

राजकुमार गुप्ता

वाराणसी/अहमदाबाद/दिल इंडिया लाइव

पीएम मोदी के गुजरात में एक ऐसा घर, जो संविधान बताता है, जी ये सच है, गुजरात की राजधानी गांधीनगर से करीब 40 किलोमीटर दूर नानी देवती गांव में बने इस खिलौनेनुमा घरों पर संक्षेप में भारत का संविधान उपलब्ध हैं। इस कलाकृति के पीछे 61 साल के दलित कार्यकर्ता मार्टिन मैकवान की सोच है, वह कहते हैं कि हर कोई संविधान को बचाने की बात कर रहा है लेकिन संविधान असल में क्या कहता है इसके बारे में लोगों को अधिक जानकारी नहीं है। इन दिनों हिन्दुस्तान में राजनीतिक उबाल है। नए नागरिकता संशोधन कानून और प्रस्तावित नेशनल रजिस्टर फॉर सिटिज़नशिप (एनआरसी) जैसे मुद्दों को लेकर लोग सड़कों पर हैं। जगह जगह प्रदर्शन हो रहे हैं। इस घर के द्वार में स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व का फलसफा है जो भारत के संविधान की बुनियाद तैयार करता है। खिड़कियों पर मौलिक अधिकार से लेकर संविधान की तमाम धाराओं के बारे में जानकारी लिखी है। घर की छत पर राष्ट्रगान के साथ गुरुदेव रवीन्द्रनाथ नाथ टैगोर दिखते हैं तो वहीं नागरिकों के मूल कर्तव्यों के बारे में भी बताया गया है। दीवारों पर सभी धर्मों के नागरिकों की तस्वीरें भी हैं और अधिकृत भाषाओं की लिस्ट भी टंगी है। 

मार्टिन महज 100 ग्राम के इस खिलौने को हाथ में लेकर पीएम के संसदीय क्षेत्र से आये सामाजिक कार्यकर्ताओं के दल के सामने कुछ मिनटों में ही संविधान का पूरा खाका खींच देते हैं जिसे जानने के लिए कई साल तक भारी भरकम कानूनी पुस्तकों का सहारा लेना पड़ता है।मार्टिन बताते हैं, “हमने इसे घर का रूप दे दिया है कि जैसे पूरे परिवार का एक अपना घर होता है वैसे ही हमारा संविधान पूरे देश का घर है। आज हर कोई नारा लगा रहा है कि संविधान बचाओ। लेकिन इस संविधान में क्या है, जिसे बचाना है, असल में संविधान की पुस्तक इतनी भारी भरकम है और कई बार कानूनी शब्दावली से भरी होती है कि लोग उसे पढ़ नहीं पाते लेकिन इस घर को दिखाकर आप किसी बच्चे को भी संविधान सिखा सकते हो.” उन्होंने गणतंत्र दिवस के पूर्व संध्या पर दलित शक्ति केंद्र पर यह प्रयोग किया है। देशभर से जुटे हजारों लोगों के बीच संविधान के घर को लोकार्पण किया। इस घर में संविधान की तमाम धाराओं के साथ याद दिलाया गया है कि महिलाओं के सम्मान के साथ छुआछूत जैसी प्रथाओं का विरोध और वैज्ञानिक सोच का विकास करना हमारी जिम्मेदारी है। एक महत्वपूर्ण बात इस घर के बाहर बाबा साहेब अंबेडकर के चित्र के साथ छपी वह टिप्पणी भी है जो संविधान सभा में दिए गए उनके आखिरी भाषण का हिस्सा है। संविधान कितना भी अच्छा हो, लेकिन उसका अमल करने वाले लोग अच्छे नहीं होंगे तो संविधान खराब साबित होगा और संविधान कितना भी खराब होगा, लेकिन उसका अमल करने वाले लोग अच्छे होंगे तो संविधान अच्छा साबित होगा। डॉ. अंबेडकर की यह टिप्पणी हिन्दुस्तान में आज के हालात पर खरी है। शायद इसीलिए नानी देवती गांव में मार्टिन के कारीगर साथियों ने ऐसे सैकड़ों घर बना दिए हैं जिन्हें आसान भाषा में संविधान की सीख देने के लिये देश में पीएम के संसदीय क्षेत्र वाराणसी सहित देशभर में जगह-जगह भेजा जा रहा है। मार्टिन कहते हैं कि गुजरात के अलावा मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र, झारखंड, उड़ीसा और पंजाब समेत कई राज्यों से संविधान की इस कलाकृति की मांग हो रही है. इसके अलावा उत्तर-पूर्व के राज्यों में भी यह नमूने भेजे जाएंगे।

वह कहते हैं, “हम देश की 22 (अधिकृत) भाषाओं और कुछ आदिवासी बोलियों (डायलेक्ट) में भी ये घर तैयार कर रहे हैं। हमने गुजराती भाषा में काम शुरू किया लेकिन देश के हर हिस्से से लोग हमें ये खिलौने भेजने का ऑर्डर दे रहे हैं। अधिक से अधिक लोगों तक संविधान की जानकारी पहुंचाना ज़रूरी है। जो सीख लोग भारी भरकम, उबाऊ और क़ानूनी भाषा-शैली वाली पुस्तक से नहीं  ले सकते उसके लिये यह प्रयोग काफी कारगर रहेगा। ऐसा कहते हुए मार्टिन के चेहरे पर संतोष की झलक दिखती है जिसमें उनके साथियों का यह नायाब सम्मिलित प्रयास झलकता है।

इस अवसर पर वाराणसी से सामाजिक कार्यकर्ताओं के दल को संविधान के घर को मार्टिन मैकवान ने दिया। इस मौके पर गोरखनाथ, अनिल कुमार, शैलेंद्र आदि लोग गुजरात के अपने तीन दिवसीय यात्रा का समापन करते हुए कहा कि संविधान घर को पीएम के संसदीय क्षेत्र में लाकर जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प भी लिया।

By |2020-01-27T07:21:10+00:00January 27th, 2020|मिसाल|Comments Off on पीएम मोदी के गुजरात में एक ऐसा घर, जो बताता है संविधान  

About the Author:

I started my career as a journalist in August 1999 with the Hindi daily Sanmarg. This letter of Dharmasangha gave me a strong identity. From October 2007 to 2010, I worked in Amar Ujala and Compact and spread across the country. When the Rashtriya Sahara Varanasi unit was launched, I was called there and from October 2010 to March 2019 I was part of this unit. Today when the world started changing, things started going digital, so I started my career as an editor in digital media with Dil India Live. This platform of mine does not work nor receive financial help from any political party, spokesperson of any social or religious organization. मैंने बतौर पत्रकार कैरियर कि शुरुआत अगस्त 1999 में हिन्दी दैनिक सन्मार्ग से किया था। धर्मसंघ के इस पत्र से मुझे मज़बूत पहचान मिली। अक्टूबर 2007 से 2010 तक मैंने अमर उजाला और काम्पैक्ट में काम किया और देश भर में छा गया। राष्ट्रीय सहारा वाराणसी यूनिट लांच हुई तो मुझे बुलाया गया वहा अक्टूबर 2010 से मार्च 2019 तक मैं इस यूनिट का हिस्सा था। आज जब दुनिया में बद्लाव शुरू हुआ, चीज़े डिज़िटल होने लगी तो मैं भी डिज़िटल मीडिया में बतौर सम्पादक अपने कैरियर कि नई शुरूआत दिल इंडिया लाइव के साथ की। मेरा यह प्लेट्फार्म किसी सियासी दल, किसी सामजिक या धार्मिक संगठन का प्रवक्ता बन कर न तो काम करता है और न ही किसी से आर्थिक मदद प्राप्त करता है।