covid19 : लाक डाउन ने तोड़ दी बुनकरों की कमर

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covid19 : लाक डाउन ने तोड़ दी बुनकरों की कमर

बिखर गया ताना-बाना, गर्त में गया वुनकर कारोबार

Varanasi/Dil India Live

एक बार फिर पूर्वांचल के बुनकरो का ताना-बाना जहाँ बिखर गया है वहीं वुनकर कारोबार गर्त में चला गया है, दरअसल लगातार लाक डाउन ने बुनकरों की कमर तोड़ दी, इसके चलते दो माह से बुनकरों का कोराबार बंद पड़ा है, मज़े की बात यह हें कि सबका साथ सबका विकास का नारा देने वाली  केन्द्र की मोदी और प्रदेश की योगी सरकार ने बुनकरों के लिए अब तक न तो कोई सरकारी पैकेज का ऐलान किया है और न ही अब तक किसी तरह की आर्थिक मदद कि ही घोषण कि है, इससे बुनकर कुनबे का हाल बेहद खराब हो चला है। उस पर से रमजान चल रहा है और ईद भी आने वाली है। ऐसे में बुनकर आर्थिक, मानसिक दोहरा तनाव झेलने को मजबूर हैं, बुनकर बिरादराना तंजीम बारह के सदर सरदार मों. हाशिम व सेकेट्री मुमताज अली बाबर अपने कुनबे की बदहाली पर चिंतित है, दोनों कहते है कि बुनकर कारोबार चौपट हो गया हैं। बुनकरो के घरो में फाके तक की नौबत है मगर लगता है कि सरकार को बुनकरों की कोई चिंता ऩही है। न तो कारोबार में सुुुुुधार कि बाते कि जा रहीहै और न तो बुनकरो को सस्ते दर पर बुुनकरी के सामान ही उपलब्ध कराया जा रहा है, हालांकि भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के डाक्टर गुफरान जावेद कहते हैं कि सरकार तक बुनकरों की बात पहुंचाने के लिए सर्वे कराया जा रहा है, बुनकरो की चिंता सरकार क़ो है। इसलिए ये कहना गलत है कि सरकार को बुनकरो की चिंता नहीं है, हां कुछ वक्त जरूर लग सकता है मगर सरकार बुनकरो के हित की रक्षा ज़रूर करेगी। समय आने पर बुुुुुुुुनकरो के लिए सरकार योजना बनायेगी।

By |2020-05-19T14:06:09+00:00May 19th, 2020|कारोबार|Comments Off on covid19 : लाक डाउन ने तोड़ दी बुनकरों की कमर

About the Author:

I started my career as a journalist in August 1999 with the Hindi daily Sanmarg. This letter of Dharmasangha gave me a strong identity. From October 2007 to 2010, I worked in Amar Ujala and Compact and spread across the country. When the Rashtriya Sahara Varanasi unit was launched, I was called there and from October 2010 to March 2019 I was part of this unit. Today when the world started changing, things started going digital, so I started my career as an editor in digital media with Dil India Live. This platform of mine does not work nor receive financial help from any political party, spokesperson of any social or religious organization. मैंने बतौर पत्रकार कैरियर कि शुरुआत अगस्त 1999 में हिन्दी दैनिक सन्मार्ग से किया था। धर्मसंघ के इस पत्र से मुझे मज़बूत पहचान मिली। अक्टूबर 2007 से 2010 तक मैंने अमर उजाला और काम्पैक्ट में काम किया और देश भर में छा गया। राष्ट्रीय सहारा वाराणसी यूनिट लांच हुई तो मुझे बुलाया गया वहा अक्टूबर 2010 से मार्च 2019 तक मैं इस यूनिट का हिस्सा था। आज जब दुनिया में बद्लाव शुरू हुआ, चीज़े डिज़िटल होने लगी तो मैं भी डिज़िटल मीडिया में बतौर सम्पादक अपने कैरियर कि नई शुरूआत दिल इंडिया लाइव के साथ की। मेरा यह प्लेट्फार्म किसी सियासी दल, किसी सामजिक या धार्मिक संगठन का प्रवक्ता बन कर न तो काम करता है और न ही किसी से आर्थिक मदद प्राप्त करता है।